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House according to Vastu : वास्तु के अनुसार भवन निर्माण :

House according to vastu : जीवन में सभी कामयाबी, प्रसिद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और धन चाहते हैं | वास्तु शास्त्र में ऐसे नियम दिए गए हैं जिनके अनुसार आप अपने भवन का निर्माण करके अपने जीवन को बेहतर कर सकते हैं | यदि आपको प्लॉट खरीद कर घर बनाना है तो वास्तु शास्त्र के अनुसार उसको कैसे बनवाना चाहिए यह इस लेख मे बताया गया है| | सबसे पहले जो आप प्लॉट खरीदे वह पूर्व मुखी, उत्तर मुखी या ईशान मुखी होना चाहिए |   प्लॉट अथवा घर के अंदर से बाहर जाते हुए मुख जिस ओर होता है प्लॉट या घर होता उस मुखी माना जाएगा | सबसे बेहतर प्लॉट पूर्व मुखी होता है | Main Door पूर्व या  उत्तर दिशा में रखें | Square या rectangle shape मे प्लॉट अच्छा रहता है क्योंकि उसमें ऊर्जा का प्रवाह अच्छे ढंग से होता है | ड्राइंग रूम आप किसी भी दिशा में बना सकते हैं | किचन आपको साउथ ईस्ट में बनाना चाहिए | बेडरूम आप South, South-west अथवा West मे बनाएं |  Master Bedroom South-west मे बनाएं | Guest Room North-west मे बनाएं | टॉयलेट और बाथरूम अलग-अलग बनवाएं |  केवल बाथरूम को उत्तर दिशा की ओर बनवाएं | टॉयलेट को South-west direction की south side या North-west direction की west side पर बनवाएं | Store तथा सीढ़ीयों को South, South-west, West अथवा North-west मे बनाएं | पूजा घर को ईशान कोण में बनाएं | बरामदा पूर्व या उत्तर की ओर रखें |  कोशिश करें कि सभी खिड़कियां और दरवाजे यदि संभव हो तो उत्तर या पूर्व दिशा में ही लगवाएं जाए | Septic Tank को North-west direction की west side पर बनवाएं | अंडरवाटर टैंक यदि बनाना है तो ईशान या उत्तर दिशा की तरफ बनाएं | Overhead tank South, South-west अथवा West मे बनाएं | पानी की निकासी उत्तर दिशा की ओर से रखें | उम्मीद है आपको House according to vastu किस प्रकार बनाना है यह समझ आ गया होगा | जय प्रकाश ज्योतिषशास्त्राचार्य एवं वास्तुशास्त्राचार्य पायरा वास्तु एक्सपर्ट एवं साइंटिफिक वास्तु एक्सपर्ट Director (Energy Vaastu) Team Head (Learn and Cure)

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Ketu Kavach

॥ केतु कवचम् ॥ केतु करालवदनं चित्रवर्ण किरीटिनम् । प्रणमामि सदा केतुं ध्वजाकारं ग्रहेश्वरम् ॥ १ ॥ चित्रवर्णः शिरः पातु भालं धूम्रसमद्युतिः । पातु नेत्रे पिंगलाक्षः श्रुती मे रक्तलोचनः ॥ २ ॥ घ्राणं पातु सुवर्णाभश्चिबुकं सिंहिकासुतः । पातु कंठं च मे केतुः स्कंधौ पातु ग्रहाधिपः ॥ ३ ॥ हस्तौ पातु सुरश्रेष्ठः कुक्षिं पातु महाग्रहः । सिंहासनः कटिं पातु मध्यं पातु महासुरः ॥ ४ ॥ ऊरु पातु महाशीर्षो जानुनी मेऽतिकोपनः । पातु पादौ च मे क्रूरः सर्वाङ्गं नरपिंगलः ॥ ५ ॥ य इदं कवचं दिव्यं सर्व रोग विनाशनम् । सर्व शत्रु विनाशम् च धारणा द्विजयी भवेत् ॥ ६ ॥ ॥ इति श्री ब्रह्माण्ड पुराणे केतुकवचं संपूर्णम् ॥  

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Panchang : पंचांग क्या है ?

Panchang क्या है? अक्सर आपने देखा होगा कि जब आप किसी पंडित या ज्योतिषी के पास मुहूर्त पूछने के लिए जाते हैं तो वह एक पुस्तक मंगाता है और उसे देखकर आपको मुहूर्त व्रत, त्यौहार या जो कुछ भी आपने पूछा है बताता है यही पुस्तक पंचांग है? पंचांग(Panchang) का अर्थ है वह पुस्तक जिसमे पांच अंगों का समावेश है|  यह पांच अंग है तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण |  इन पांच अंगों के अलावा भी एक अच्छे पंचांग में बहुत सारी जानकारी रहती है जैसे व्रत और त्योहारों की सूची, ग्रहण विवरण, ज्योतिष के कुछ उपाय, 12 राशियों के फल, विवाह मुहूर्त, मुंडन मुहूर्त, गृह प्रवेश मुहूर्त आदि आदि | तिथि (What is Tithi in Panchang) :- तिथि पंचांग के पांच अंगो मे से एक है| सरल भाषा मे कहें तो सूर्य के अंश से चंद्र के अंश का अंतर जब 12 अंश हो जाता है तब एक तिथि होती है| 13 से 24 तक दूसरी 25 से 36 तीसरी और इसी प्रकार बढ़ते बढ़ते 15 तिथि हो जाती हैं अमावस्या के बाद से पूर्णिमा तक चंद्र बढ़ता है और इसे शुक्ल पक्ष कहते हैं इसमें पूर्णिमा तिथि को 15 संख्या से पंचांग मे दर्शाया जाता है| पूर्णिमा के बाद प्रतिपदा से शुरू होकर चंद्र जब घटता है इसे कृष्ण पक्ष कहते हैं और इसी प्रकार घटते घटते 15 तिथियां हो जाती हैं और अमावस्या तिथि आ जाती है अमावस्या तिथि को पंचांग में 30 संख्या से पंचांग मे दर्शाया जाता है| बाकी 14 तिथियां शुक्ल पक्ष हो या कृष्ण पक्ष 1 से 14 संख्या से दर्शायी जाती है | तिथियों की संख्या और नाम इस प्रकार है :- 1)   प्रतिपदा 2)   द्वितीया 3)   तृतीया 4)   चतुर्थी 5)   पंचमी 6)   षष्ठी 7)   सप्तमी 8)   अष्टमी 9)   नवमी 10) दशमी 11) एकादशी 12) द्वादशी 13) त्रयोदशी 14) चतुर्दशी 15 की संख्या से पूर्णिमा और 30 की संख्या से अमावस्या को दर्शाया जाता है। करण (What is Karan in Panchang) – करण पंचांग के पांच अंगो मे से एक है| तिथि के आधे भाग को करण कहते हैं | 12 अंश की एक तिथि होती है 6 अंश का एक करण होता है अर्थात एक तिथि मे दो करण होते हैं | वार (What is Vaar in Panchang):- वार पंचांग के पांच अंगो मे से एक है| भारतीय ज्योतिष में एक वार एक सूर्योदय से दूसरे सूर्योदय तक माना जाता है | वार का क्रम वैसा ही है जैसा सारी दुनिया मे प्रचलित है| रविवार, सोमवार, मंगलवार, बुधवार, बृहस्पतिवार, शुक्रवार और शनिवार।  यह सात वार हैं। सातो वारो के नाम किसी ग्रह पर आधारित है । नक्षत्र (What is Nakshatra in Panchang) :- नक्षत्र पंचांग के पांच अंगो मे से एक है| ज्योतिष शास्त्र में मेष राशि से मीन राशि तक 12 राशियां होती हैं|  इन 12 राशियों का आधार 27 नक्षत्र है|  इन 27 नक्षत्रो के अलावा अभिजित नक्षत्र भी इन्हीं 27 नक्षत्र मे से उत्तराषाढ़ा और श्रवण के मध्य माना गया है | नक्षत्र अश्वनी से रेवती तक होते हैं।  अश्वनी पहला और रेवती 27वां नक्षत्र है। योग (What is Yoga in Panchang) :- योग पंचांग के पांच अंगो मे से एक है| सूर्य अंश और चंद्र अंश के जोड़ से योग का निर्माण होता है |  योगों की संख्या 27 है | 27 योगों के नाम इस प्रकार हैं:- विष्कुम्भ, प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, शोभन, अतिगण्ड, सुकर्मा, धृति, शूल, गण्ड, वृद्धि, ध्रुव, व्याघात, हर्षण, वज्र, सिद्धि, व्यतीपात, वरीयान्, परिघ, शिव, सिद्ध, साध्य, शुभ, शुक्ल, ब्रह्म, इन्द्र और वैधृति। आज के लेख में Panchang का संक्षिप्त विवरण दिया है आगे के लेखो मे हम इन पांचो अंगों के बारे में विस्तार से बताएंगे | जय प्रकाश ज्योतिषशास्त्राचार्य एवं वास्तुशास्त्राचार्य पायरा वास्तु एक्सपर्ट एवं साइंटिफिक वास्तु एक्सपर्ट Director (Energy Vaastu) Team Head (Learn and Cure) www.learnandcure.com  

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Vaastu & Kitchen : Kitchen Vastu : वास्तु और रसोई घर :

वास्तु शास्त्र मे kitchen Vastu के अनुसार होना महत्त्वपूर्ण होता है। घर को मानव शरीर की तरह माना जाता है। जैसे शरीर मे सभी अंगो का सही जगह होना महत्त्वपूर्ण होता है उसी प्रकार घर मे भी रसोई घर, शयन कक्ष, पूजा घर आदि सबका वास्तु के अनुसार सही स्थान पर होना महत्त्वपूर्ण होता है। ऐसा नही होने पर घर मे शुभ ऊर्जा के संचार मे कमी आ जाती है।  आज की पोस्ट मे हम रसोई घर की बात करेंगे कि वास्तु के अनुसार रसोई घर कहाँ स्थित होना चाहिए। Kitchen Vastu के अनुसार कहाँ हो रसोई घर  :- रसोई घर(किचन) मे मुख्य रूप से अग्नि का कार्य होता है। इस कारण हमारे घर का जो हिस्सा अग्नि तत्त्व से सम्बंधित है वहां पर रसोई घर (किचन) होना चाहिए। आग्नेय कोण(South-East Corner) अग्नि तत्त्व(Fire Element) से सम्बंधित क्षेत्र है इसलिए वास्तु शास्त्र मे इसको रसोई घर के निर्माण के लिए निश्चित किया गया है। आपको अपने रसोई घर का निर्माण आग्नेय कोण मे करना चाहिए यह आपके लिए उत्तम स्वास्थ्य और धन की बढ़ोतरी लेकर आयेगा। यह नियम घर और कार्य स्थल दोनो पर लागू होता है। यदि आपके लिए आग्नेय कोण मे रसोई घर का निर्माण संभव नही है तो आप इसको वायव्य कोण(North-West Corner) के पश्चिम(West) वाले भाग मे बनायें। यदि आपके लिए आग्नेय कोण और वायव्य कोण के पश्चिम भाग मे रसोई घर का निर्माण संभव नही हो तो फिर आप पूर्व दिशा(East Direction) मे रसोई घर का निर्माण करें। Kitchen vastu के नियमो के अनुसार रसोई घर का निर्माण करें और जीवन मे सफलता का प्रतिशत बढ़ाये। जय प्रकाश ज्योतिष आचार्य एवं वास्तु आचार्य पायरा वास्तु एक्सपर्ट एवं साइंटिफिक वास्तु एक्सपर्ट Director (Energy Vaastu) Team Head (Learn & Cure)

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Vastu Dosh Nivaran by Yantra : यंत्रो से वास्तु दोष निवारण :

Vastu Dosh Nivaran : Vastu Dosh Remedies : वास्तु और ज्योतिष मे यंत्रो को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है यंत्रो को अभिमंत्रित करने के बाद की जाने वाली पूजा विशेष फलदायी होती है। आज इस लेख में यंत्रो  से वास्तु दोष निवारण किस प्रकार किया जा सकता है इसकी जानकारी दी गयी है। यंत्रो का ज्योतिष शास्त्र मे विशेष स्थान है। यंत्रो को अभिमंत्रित करके यदि आप पूजाघर में रखते है और रोज उनकी पूजा या धूप दीप करते है तो मनोकामनायें जल्दी पूरी होती हैं, घर मे सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। वास्तु मे मुख्य रूप से जो आठ दिशायें मानी गयी हैं वो सभी दिशायें ग्रहों से सम्बंधित हैं। जिस दिशा मे वास्तु दोष हो उसके स्वामी ग्रह के दो यन्त्र लायें। दोनों को पूजाघर मे रख कर किसी कर्मकांडी पंडित से अभिमंत्रित करवायें।  उसके बाद उनमे से एक को उस ग्रह की पीड़ित दिशा मे स्थापित करें और रोज पूजाघर मे स्थापित यन्त्र की पूजा करें और पूजा के बाद दीवार पर स्थापित यन्त्र को भी धूप दीप दिखायें। धूप दीप दिखाते हुए उस ग्रह के मंत्र का उच्चारण करते रहें।  पीड़ित दिशा के दुष्परिणाम समाप्त हो जाएंगे और तोड़-फोड़ की आवश्यकता नही पड़ेगी। दिशा, ग्रह, यन्त्र और उच्चारण मंत्र :- उत्तर दिशा –          उत्तर दिशा बुध ग्रह की दिशा है इस दिशा की दीवार पर बुध यन्त्र स्थापित करें। उच्चारण मंत्र :-  ॐ बुं बुधाय नम: ईशान दिशा-         ईशान दिशा बृहस्पति ग्रह की दिशा है इस दिशा की दीवार पर बृहस्पति यन्त्र स्थापित करें। उच्चारण मंत्र :- ॐ बृं बृहस्पतये नम: पूर्व दिशा –            पूर्व दिशा सूर्य ग्रह की दिशा है इस दिशा की दीवार पर सूर्य यन्त्र स्थापित करें। उच्चारण मंत्र :- ॐ घृणि: सूर्याय नम: आग्नेय दिशा-        आग्नेय दिशा शुक्र ग्रह की दिशा है इस दिशा की दीवार पर शुक्र यन्त्र स्थापित करें। उच्चारण मंत्र :- ॐ शुं शुक्राय नम: दक्षिण दिशा-         दक्षिण दिशा मंगल ग्रह की दिशा है इस दिशा की दीवार पर मंगल यन्त्र स्थापित करें। उच्चारण मंत्र :-  ॐ अं अंगारकाय नम: नैऋत दिशा-         नैऋत दिशा राहू ग्रह की दिशा है इस दिशा की दीवार पर राहू यन्त्र स्थापित करें। उच्चारण मंत्र :- ॐ रां राहवे नम: पश्चिम दिशा-         पश्चिम दिशा शनि ग्रह की दिशा है इस दिशा की दीवार पर शनि यन्त्र स्थापित करें। उच्चारण मंत्र :- ॐ शं शनैश्चराय नम: वायव्य दिशा-        वायव्य दिशा चंद्र ग्रह की दिशा है इस दिशा की दीवार पर चंद्र यन्त्र स्थापित करें। उच्चारण मंत्र :- ॐ सों सोमाय नम: उपरोक्त प्रकार से यंत्रो के इस्तेमाल से आप बिना तोड़-फोड़ के वास्तु दोषों को दूर कर सकते हैं। जय प्रकाश ज्योतिषशास्त्राचार्य एवं वास्तुशास्त्राचार्य पायरा वास्तु एक्सपर्ट एवं साइंटिफिक वास्तु एक्सपर्ट Director (Energy Vaastu) Team Head (Learn and Cure)

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Kitchen interior design as per Vaastu : वास्तु के अनुसार रसोई घर की आंतरिक सज्जा :

वास्तु के अनुसार रसोईघर (Kitchen) कहाँ स्थित होना चाहिए यह जितना महत्त्वपूर्ण है उतना ही महत्त्वपूर्ण Kitchen interior design है । रसोईघर की आंतरिक सज्जा(Interior) कैसी होनी चाहिए । आज के लेख मे हम इस बारे मे बात करेंगे। वास्तु के अनुसार रसोईघर की आंतरिक सज्जा : Kitchen interior design as per vaastu : रसोईघर मे सबसे मुख्य कार्य अग्नि तत्त्व का होता है इसलिए सबसे अधिक ध्यान देने योग्य बात ये है कि गैस का चूल्हा कहाँ रखा जाये। किचन का प्लेटफार्म ‘L’ शेप मे बनाये, उत्तर दिशा से शुरू करके आग्नेय दिशा तक। गैस के चूल्हे को आग्नेय कोण के पूर्वी हिस्से में स्लैब पर इस प्रकार रखना चाहिए की खाना पकाने वाला का मुख पूर्व दिशा की ओर रहे। यदि आग्नेय कोण के पूर्व वाले क्षेत्र मे चूल्हा रखना संभव नही हो या आप समझ नही पा रहे हो की यह क्षेत्र कहाँ पड़ रहा है तो आप गैस का चूल्हा रसोईघर की पूर्व दिशा की ओर इस प्रकार स्थापित करें कि कार्य करते समय मुख पूर्व दिशा की ओर ही रहे। आग्नेय कोण और आग्नेय कोण के दक्षिण हिस्से मे ओवन, टोस्टर और बिजली से चलने वाले उपकरण रखें। बिजली के स्विच बोर्ड भी यहीं लगाने चाहिए। रसोईघर मे वाशबेसिन उत्तर दिशा मे और पानी के स्रोत, पानी का संग्रहण उत्तर या ईशान दिशा मे करें । फ्रिज को उत्तर-पश्चिम अथवा पश्चिम दिशा की ओर रखें। किचन मे जो सामान रक्खा जाता है उसके लिए अलमारी इत्यादि इस प्रकार बनवायें की अधिक भार दक्षिण और पश्चिम की दिशा की ओर रहे। आशा है कि Kitchen interior design वास्तु के अनुसार कैसा होना चाहिए यह आपको समझ आ गया होगा। जय प्रकाश ज्योतिषशास्त्राचार्य एवं वास्तुशास्त्राचार्य पायरा वास्तु एक्सपर्ट एवं साइंटिफिक वास्तु एक्सपर्ट Director (Energy Vaastu) Team Head (Learn and Cure)    

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Shani Dhaiya : क्या होती है ? कैसे देखते हैं?

Shani Dhaiya चल रही है जब भी कोई ज्योतिषी बताता है तो एक अनजाना भय और सवाल मन मे आता है की ये शनि ढैया होती क्या है ? कैसे पता लगता है ? जानिये आज इस लेख मे और स्वयं जानिये आपकी Shani Dhaiya चल रही है या नही। Shani Dhaiya क्या होती है : राशि चक्र मे 12 राशियां होती है। शनि ढैया एक समय मे इन 12 राशियों मे से 2 राशियों पर एक साथ रहती है। Shani Dhaiya कैसे देखते हैं : 12 राशियों मे से प्रत्येक व्यक्ति की कोई ना कोई जन्म राशि होती है। नीचे हम राशि और राशि संख्या बता रहे हैं :- राशि संख्या राशि नाम 1 मेष 2 वृष 3 मिथुन 4 कर्क 5 सिंह 6 कन्या 7 तुला 8 वृश्चिक 9 धनु 10 मकर 11 कुम्भ 12 मीन आपकी जो जन्म राशि है उस राशि से शनि देव जब चतुर्थ राशि अथवा अष्टम राशि मे गोचर करते हैं तब Shani Dhaiya होती है। अपनी जन्म राशि को पहली राशि गिनना है। उदाहरण के लिए आज दिनांक 06.12.2023 को शनि देव कुम्भ राशि मे गोचर कर रहे हैं।  इसका अर्थ यह हुआ कि जिस राशि से कुम्भ राशि चतुर्थ अथवा अष्टम होगी उस राशि की Shani Dhaiya होगी। जिस व्यक्ति की जन्म राशि वृश्चिक है वह वृश्चिक राशि को पहली राशि मान कर कुम्भ राशि तक गिने तो पहली राशि वृश्चिक, दूसरी राशि धनु, तीसरी राशि मकर और चौथी अथवा चतुर्थ राशि कुम्भ होगी। अर्थ यह हुआ की वृश्चिक राशि वालो को Shani Dhaiya चल रही है और जब शनि देव मीन राशि मे जायेंगे तब वृश्चिक राशि की Shani Dhaiya समाप्त हो जायेगी और धनु राशि वालो की Shani Dhaiya शुरू हो जायेगी। जैसा कि पहले बताया है कि Shani Dhaiya एक साथ दो राशियों पर होती है तो अब हम देखते है कि दूसरी राशि कौन सी है जिस पर Shani Dhaiya है। कर्क राशि को पहली राशि मान कर कुम्भ राशि तक गिने तो पहली राशि कर्क, दूसरी सिंह, तीसरी कन्या, चौथी राशि तुला, पांचवी राशि वृश्चिक, छठी राशि धनु, सातवीं राशि मकर और आठवीं अथवा अष्टम राशि कुम्भ होगी। अर्थ यह हुआ की कर्क राशि वालो की भी Shani Dhaiya चल रही है और जब शनि देव मीन राशि मे जायेंगे तब कर्क राशि की Shani Dhaiya समाप्त हो जायेगी और सिंह राशि वालो की Shani Dhaiya शुरू हो जायेगी। Shani Dhaiya effects : शनि की ढैया के प्रभाव :- ⇨मानसिक शांति नष्ट हो जायेगी। ⇨व्यर्थ की भाग दौड़ होती रहेगी। ⇨ग्रह कलेश रहेगा। ⇨दीर्घ कालीन बीमारियाँ परेशान कर सकती है। ⇨आर्थिक समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। ⇨शत्रुओं की सँख्या में वृद्धि होगी। Shani Dhaiya Upay : शनि की ढैया के उपाय :- ⇨   काली उड़द की साबुत दाल शनिवार को शनि मंदिर मे चढ़ाये। ⇨   सात प्रकार के अनाज का दान शनि मंदिर में शनिवार को करें। ⇨   सवा मीटर काला कपड़ा शनि दान मांगने वाले को दान करें। ⇨   सरसो के तेल का दीपक प्रत्येक शनिवार को शनि मंदिर में उस तेल में अपनी छायां देख कर   जलायें। जिनकी कुंडली मे शनि राज योग कारक है या बली है या जिनके जन्म लग्न के अनुसार और राशि के अनुसार शनि ग्रह शुभ है उनको अशुभ परिणाम कम मिलेंगे। जिनके लिए शनि उनके जन्म लग्न के अनुसार और राशि के अनुसार अशुभ हैं उनको अशुभ परिणाम ज्यादा मिलेंगे। केवल महादशा और अन्तर्दशा शनि की होने पर नीलम पहनने की गलती ना करे ये समस्यायों को और ज्यादा गंभीर कर सकता है। यह भी आवश्यक नही है कि शनि ढैया के कारण आपको समस्या हो रही हो आपकी महादशा, अन्तर्दशा और प्रत्यंतर दशा भी कारण हो सकती है इसलिए किसी योग्य ज्योतिषी से पूंछकर ही उपाय करें। जय प्रकाश ज्योतिषशास्त्राचार्य एवं वास्तुशास्त्राचार्य पायरा वास्तु एक्सपर्ट एवं साइंटिफिक वास्तु एक्सपर्ट Director (Energy Vaastu) Team Head (Learn and Cure)  

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Rahu Kaal: Rahu Kaal today: Rahu Kalam today: Today’s Rahu Kaal

राहु काल अर्थात राहु ग्रह का समय। ज्योतिष में राहु को भी नव ग्रहों मे से एक माना गया है। राहु को अशुभ ग्रहों की श्रेणी में रखा गया है। प्रत्येक दिन डेढ़ घंटे का समय राहु ग्रह को मिला हुआ है इसे ही राहु काल कहते है। राहु काल का वास्तविक समय उस स्थान के सूर्योदय और सूर्यास्त की गणना करने के बाद निकाला जाता है और विभिन्न शहरों के राहु काल की अवधि भी भिन्न भिन्न होती है। सूर्योदय से सूर्यास्त तक जितने घंटे होते है उनको 8 से भाग देने पर राहु काल की सही अवधि ज्ञात की जाती है। अलग अलग शहरों मे सूर्योदय और सूर्यास्त के भिन्न होने के कारण राहु काल में कुछ पलो (मिनटो) का अंतर आता है। ज्योतिष मे राहु काल की गणना के लिए एक मानक(Standard) नियम बनाया गया है। इसमे सूर्योदय का एक मानक(Standard) समय प्रातः 6 बजे और सूर्यास्त का शाम 6 बजे माना गया है। सूर्योदय से सूर्यास्त का अंतर 12 घंटे का होता है। 12 को 8 से भाग देने पर 1.5 यानि डेढ़ घंटे का समय आता है, इसलिए डेढ़ घंटे का राहु काल प्रतिदिन होता है। Rahu Kaal today 28.11.2023: Standard Rahu Kaal Tuesday From To 15:00 16:30 Exact Rahu Kaal for some cities on 28.11.2023 (Tuesday):   City RAHU KAAL 28-11-23 Start   End Ahmedabad 15 : 10 Hrs   16 : 32 Hrs Allahabad 14 : 31 Hrs   15 : 51 Hrs Bangalore 14 : 59 Hrs   16 : 25 Hrs Chennai 14 : 48 Hrs   16 : 14 Hrs Chandigarh 14 : 46 Hrs   16 : 04 Hrs Dehradun 14 : 41 Hrs   15 : 59 Hrs Delhi 14 : 46 Hrs   16 : 05 Hrs Goa 15 : 12 Hrs   16 : 37 Hrs Ghaziabad 14 : 46 Hrs   16 : 04 Hrs Greater Noida 14 : 45 Hrs   16 : 04 Hrs Haridwar 14 : 41 Hrs   15 : 59 Hrs Hyderabad 14 : 55 Hrs   16 : 15 Hrs Indore 14 : 58 Hrs   16 : 19 Hrs Jaipur 14 : 54 Hrs   16 : 14 Hrs Jammu 14 : 52 Hrs   16 : 08 Hrs Kanpur 14 : 36 Hrs   15 : 56 Hrs Kolkata 14 : 08 Hrs   15 : 29 Hrs Lucknow 14 : 33 Hrs   15 : 53 Hrs Mumbai 15 : 13 Hrs   16 : 36 Hrs Mathura 14 : 46 Hrs   16 : 05 Hrs Noida 14 : 46 Hrs   16 : 05 Hrs Nagpur 14 : 46 Hrs   16 : 08 Hrs Puri 14 : 20 Hrs   15 : 43 Hrs Pune 15 : 09 Hrs   16 : 33 Hrs Rishikesh 14 : 41 Hrs   15 : 59 Hrs Surat 15 : 11 Hrs   16 : 33 Hrs Ujjain 14 : 57 Hrs   16 : 19 Hrs   राहु काल को ज्योतिष में अशुभ काल माना गया है और किसी भी शुभ अथवा नए महत्वपूर्ण कार्य को इसमे शुरू करने की मनाही है क्योंकि इसमें शुरू किया हुआ कार्य बिना किसी रूकावट के पूरा नहीं हो पाता है। राहु काल में वर्जित कार्य :- ⇒ नया व्यापार आरम्भ करना। ⇒ महत्वपूर्ण यात्रा शुरू करना। ⇒ बड़े और नए सौदे करना। ⇒ बहुमूल्य वस्तु खरीदना। ⇒ धार्मिक कार्य जैसे यज्ञ आदि करना। ⇒ सगाई तथा विवाह। ⇒ गृह प्रवेश।   जय प्रकाश ज्योतिषशास्त्राचार्य एवं वास्तुशास्त्राचार्य पायरा वास्तु एक्सपर्ट एवं साइंटिफिक वास्तु एक्सपर्ट Director (Energy Vaastu) Team Head (Learn and Cure) www.learnandcure.com

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HEALTH SOLUTIONS FOR PERSON BORN ON 01, 10, 19 & 28 :

Health issues and solutions for person born on 01st, 10th, 19th and 28th of any month : जो लोग किसी भी महीने की 1 तारीख, 10 तारीख, 19 तारीख या 28 तारीख को पैदा होते हैं उन लोगों को किन रोगों के होने की सम्भावना अधिक है। कौन सी एक्सरसाइज और योगासन इनके लिए अच्छे रहते हैं और उनके स्वास्थ्य के लिए उत्तम खाद्य पदार्थ कौन से हैं। यह सारी जानकारी इस पोस्ट मे आपको मिलेगी। Birth Number 1 and diseases :- जो लोग किसी भी महीने की 1 तारीख, 10 तारीख, 19 तारीख या 28 तारीख को पैदा होते हैं उनको नीचे दिये गये रोगों के होने की सम्भावना अधिक है। सिर दर्द, माइग्रेन, ब्लड प्रेशर, हृदय की धड़कने तेज हो जाना,  आँख और आँख से सम्बंधित समस्यायें, खून और खून के सर्कुलेशन से रिलेटेड समस्यायें इसके अलावा हार्ट और हार्ट से रिलेटेड समस्यायें। Birth Number 1 and exercises :- अब हम बात करते हैं कि कौन सी एक्सरसाइज और योगासन इनके लिए अच्छे रहते हैं तो प्राणायाम, अनुलोम विलोम, मैडिटेशन और सूर्य नमस्कार इनके लिए अच्छे आसन हैं। अगर हार्ट से रिलेटेड कोई डिजीज है तो सूर्य नमस्कार आसन न करे बाकी के आसन आप कर सकते हैं। Healthy food for Birth Number 1 :- अब हम इस बात पर आते हैं कि कौन से खाद्य पदार्थ हैं जो इनके स्वास्थ्य के लिए उत्तम रहते हैं। केसर, खजूर, किशमिश, लौंग, सोंठ, अदरक, शहद, नीम्बू, संतरा, जौ, जौ की रोटी और जौ का पानी वो खाद्य पदार्थ हैं जो इनके स्वास्थ्य के लिये उत्तम रहते हैं। जय प्रकाश ज्योतिषशास्त्राचार्य एवं वास्तुशास्त्राचार्य पायरा वास्तु एक्सपर्ट एवं साइंटिफिक वास्तु एक्सपर्ट Director (Energy Vaastu) Team Head (Learn and Cure)

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HEALTH SOLUTIONS FOR PERSON BORN ON 02, 11, 20 & 29 :

HEALTH SOLUTIONS FOR BIRTH NO.2 : JANMANK 2 AUR SWASTHYA Health issues and solutions for person born on 02nd, 11th, 20th and 29th of any month : जो लोग किसी भी महीने की 2 तारीख, 11 तारीख, 20 तारीख या 29 तारीख को पैदा होते हैं उन लोगों को किन रोगों के होने की सम्भावना अधिक है। कौन सी एक्सरसाइज और योगासन इनके लिए अच्छे रहते हैं और उनके स्वास्थ्य के लिए उत्तम खाद्य पदार्थ कौन से हैं। यह सारी जानकारी इस पोस्ट मे आपको मिलेगी। Birth Number 2 and diseases :- जो लोग किसी भी महीने की 2 तारीख, 11 तारीख, 20 तारीख या 29 तारीख को पैदा होते हैं उनको नीचे दिये गये रोगों के होने की सम्भावना अधिक है। त्वचा रोग, अपनी क्षमता से अधिक मेहनत करने से बीमार पड़ जाते हैं। नर्वस सिस्टम से सम्बंधित रोग। हड्डियों और जोड़ो मे दर्द, विशेषकर घुटनो से सम्बंधित समस्यायें तथा छाती और फेफड़ो से सम्बंधित रोग होने की सम्भावनायें होती हैं । Birth Number 2 and exercises :- अब हम बात करते हैं कि कौन सी एक्सरसाइज और योगासन इनके लिए अच्छे रहते हैं तो शीर्षासन, धनुर्रासन, सूर्य नमस्कार और शवासन इनके लिए अच्छे आसन हैं। Healthy food for Birth Number 2 :- अब हम इस बात पर आते हैं कि कौन से खाद्य पदार्थ हैं जो इनके स्वास्थ्य के लिए उत्तम रहते हैं। सेब, अनानास, अनार, अंगूर, अंजीर, बेर, बादाम, चुकुन्दर, चेरी, जैतून, केसर, लौंग, नाशपाती, स्ट्रॉबेरी और शहतूत वो खाद्य पदार्थ हैं जो इनके स्वास्थ्य के लिये उत्तम रहते हैं। जय प्रकाश ज्योतिषशास्त्राचार्य एवं वास्तुशास्त्राचार्य पायरा वास्तु एक्सपर्ट एवं साइंटिफिक वास्तु एक्सपर्ट Director (Energy Vaastu) Team Head (Learn and Cure)

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